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स्वस्थ जीवन

ऐसे बच्चों में होता हैं ऑटिज्म का ज्यादा खतरा, जानें- क्या हैं लक्षण

ऑटिज्म बीमारी क्या है?

हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, ऑटिज्म एक प्रकार की मानसिक बीमारी है. इस बीमारी के लक्षण बचपन से ही बच्चे में नजर आने लगते हैं. इस बीमारी में बच्चे का मानसिक विकास ठीक तरह से नहीं हो पाता है. इस बीमारी से जूझ रहे बच्चे दूसरे लोगों के साथ घुलने-मिलने से कतराते हैं. ऐसे बच्चे किसी भी विषय पर अपनी प्रतिक्रियाएं देने में भी काफी समय लेते हैं.

क्यों होता है ऑटिज्म?

दुनियाभर में ज्यादातर लोग ऑटिज्म बीमारी से पीड़ित हैं. इस बीमारी का अभी वास्तविक कारण पता नहीं लग पाया है. लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि ऑटिज्म की बीमारी जींस के कारण भी हो सकती है. इसके अलावा वायरस जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी भी ऑटिज्म को जन्म दे सकती है.इस बीमारी पर हुई एक स्टडी में बताया गया है कि पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) से पीड़ित महिलाओं के पैदा होने वाले बच्चों में ऑटिज्म विकसित होने की अधिक आशंका रहती है. इसके अलावा प्रेग्नेंसी के दौरान महिला में किसी बीमारी या पोषक तत्वों की कमी भी उनके बच्चे को ऑटिज्म बीमारी का शिकार बना सकती है.

क्या होते हैं लक्षण- ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे सामान्य बच्चों की तरह किसी भी बात पर प्रतिक्रिया देने से कतराते हैं. ऐसे बच्चे आवाज सुनने के बावजूद भी प्रतिक्रिया नहीं देते हैं.ऑटिज्म पीड़ित बच्चों को भाषा संबंधी भी कई रुकावटों का सामना करना पड़ता है.ऑटिज्म बीमारी से पीड़ित बच्चे अपने आप में ही खोए रहते हैं.अगर आपका बच्चा नौ महीने का होने के बावजूद न तो मुस्कुराता है और न ही कोई प्रतिक्रिया देता है तो सावधान हो जाएं क्योंकि ये ऑटिज्म का ही लक्षण है.ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे कभी भी किसी से नजरे मिलाकर बात नहीं करते हैं.मानसिक विकास न होने की वजह से ऑटिज्म से जूझ रहे बच्चों में समझ विकसित नहीं हो पाती है जिस कारण उन्हें शब्दों को समझने में दिक्कत होती है.

कारण:

बाल्यावस्था में सामान्य बच्चों व ऑटिस्टिक बच्चों में कुछ प्रमुख अंतर होते हैं जिनके आधार पर इस अवस्था की पहचान की जा सकती है जैसे कि सामान्य बच्चे माँ का चेहरा देखते हैं व उसके हाव-भाव को समझने की कोशिश करतें है परन्तु ऑटिज़्म से ग्रसित बच्चे किसी से नज़र मिलाने से कतराते हैं,

सामान्य बच्चे आवाजें सुनने से खुश हो जाते हैं परन्तु ऑटिस्टिक बच्चे आवाजों पर ध्यान नहीं देते तथा कभी-कभी बधिर प्रतीत होते हैं,

सामान्य बच्चे धीरे-धीरे भाषा-ज्ञान में वृद्वि करते हैं, परन्तु ऑटिस्टिक बच्चे बोलने से कुछ समय बाद अचानक ही बोलना बंद कर देते हैं तथा अजीब आवाजें निकालते हैं,

सामान्य बच्चे माँ के दूर होने पर या अनजाने लोगों से मिलने पर परेशान हो जाते हैं परन्तु औटिस्टिक बच्चे किसी के भी आने या जाने से परेशान नहीं होते,

ऑटिस्टिक बच्चे तकलीफ के प्रति कोई क्रिया नहीं करते तथा उससे बचने की कोशिश नहीं करते,

सामान्य बच्चे करीबी लोगों को पहचानते हैं तथा उनसे मिलने पर मुस्कुरातें है पर ऑटिस्टिक बच्चे कोशिश करने पर भी किसी से बात नहीं करते जैसे अपनी ही किसी दुनिया में खोये रहतें हैं,

ऑटिस्टिक बच्चे एक ही वस्तु या कार्य में उलझे रहते हैं तथा अजीब क्रियाओ को बार-बार दोहरातें हैं जैसे ओगे-पीछे हिलना, हाँथ को हिलाते रहना, आदि,

ऑटिस्टिक बच्चे अन्य बच्चो की तरह काल्पनिक खेल नहीं खेल पाते वह खेलने की बजाए खिलौनों को सूंघते या चाटतें हैं,

ऑटिस्टिक बच्चे बदलाव को बर्दाशत नहीं कर पाते व अपने क्रियाकलापों को नियमानुसार ही करना चाहतें हैं

ऑटिस्टिक बच्चे या तो बहुत चंचल या बहुत सुस्त रहते हैं,

इन बच्चो में अधिकतर कुछ विशेष बातें होती हैं जैसे किसी एक इन्द्री (जैसे, श्रवण शक्ति) का अतितीव्र होना।

लक्षण:

आत्मविमोह को एक लक्षण के बजाय एक विशिष्ट लक्षणों के समूह द्वारा बेहतर समझा जा सकता है। मुख्य लक्षणों में शामिल हैं सामाजिक संपर्क में असमर्थता बातचीत करने में असमर्थता सीमित शौक और दोहराव युक्त व्यवहार है। अन्य पहलुओं मे जैसे खाने का अजीब तरीका हालाँकि आम है लेकिन निदान के लिए आवश्यक नहीं है।सामाजिक विकास आत्मविमोह के शिकार मनुष्य सामाजिक व्यवहार में असमर्थ होने के साथ ही दूसरे लोगों के मंतव्यों को समझने में भी असमर्थ होते हैं इस कारण लोग अक्सर इन्हें गंभीरता से नहीं लेते।सामाजिक असमर्थतायें बचपन से शुरु हो कर व्यस्क होने तक चलती हैं। ऑटिस्टिक बच्चे सामाजिक गतिविधियों के प्रति उदासीन होते है वो लोगो की ओर ना देखते हैं ना मुस्कुराते हैं और ज्यादातर अपना नाम पुकारे जाने पर भी सामान्य: कोई प्रतिक्रिया नहीं करते हैं। ऑटिस्टिक शिशुओं का व्यवहार तो और चौंकाने वाला होता है वो आँख नहीं मिलाते हैं और अपनी बात कहने के लिये वो अक्सर दूसरे व्यक्ति का हाथ छूते और हिलाते हैं। तीन से पाँच साल के बच्चे आमतौर पर सामाजिक समझ नहीं प्रदर्शित करते है बुलाने पर एकदम से प्रतिकिया नहीं देते भावनाओं के प्रति असंवेदनशील मूक व्यवहारी और दूसरों के साथ मुड़ जाते हैं। इसके बावजूद वो अपनी प्राथमिक देखभाल करने वाले व्यक्ति से जुडे होते है।आत्मविमोह से ग्रसित बच्चे आम बच्चो के मुकाबले कम संलग्न सुरक्षा का प्रदर्शन करते हैं (जैसे आम बच्चे माता पिता की मौजूदगी में सुरक्षित महसूस करते हैं) यद्यपि यह लक्षण उच्च मस्तिष्क विकास वाले या जिनका ए एस डी कम होता है वाले बच्चों में गायब हो जाता है। असद से ग्रसित बड़े बच्चे और व्यस्क चेहरों और भावनाओं को पहचानने के परीक्षण में बहुत बुरा प्रदर्शन करते हैं।आम धारणा के विपरीत आटिस्टिक बच्चे अकेले रहना पसंद नहीं करते। दोस्त बनाना और दोस्ती बनाए रखना आटिस्टिक बच्चे के लिये अक्सर मुश्किल साबित होता है। इनके लिये मित्रों की संख्या नहीं बल्कि दोस्ती की गुणवत्ता मायने रखती है। एएसडी से पीडित लोगों के गुस्से और हिंसा के बारे में काफी किस्से हैं लेकिन वैज्ञानिक अध्ययन बहुत कम हैं। यह सीमित आँकडे बताते हैं कि आत्मविमोह के शिकार मंद बुद्धि बच्चे ही अक्सर आक्रामक या उग्र होते है। डोमिनिक एट अल ने ६७ एएसडी से ग्रस्त बच्चों के माता-पिता का साक्षात्कार लिया और निष्कर्श निकाला कि दो तिहाई बच्चों के जीवन में ऎसे दौर आते हैं जब उनका व्यवहार बहुत बुरा (नखरे वाला) हो जाता है जबकि एक तिहाई बच्चे आक्रामक हो जाते हैं अक्सर भाषा को ठीक से न जानने वाले बच्चे नखरैल होते हैं।

पहचान:

बाल्यावस्था में सामान्य बच्चों व ऑटिस्टिक बच्चों में कुछ प्रमुख अंतर होते हैं जिनके आधार पर इस अवस्था की पहचान की जा सकती है जैसे कि-सामान्य बच्चे माँ का चेहरा देखते हैं व उसके हाव-भाव को समझने की कोशिश करतें है परन्तु ऑटिज़्म से ग्रसित बच्चे किसी से नज़र मिलाने से कतराते हैं,

सामान्य बच्चे आवाजें सुनने से खुश हो जाते हैं परन्तु ऑटिस्टिक बच्चे आवाजों पर ध्यान नहीं देते तथा कभी-कभी बधिर प्रतीत होते हैं,

सामान्य बच्चे धीरे-धीरे भाषा-ज्ञान में वृद्वि करते हैं, परन्तु ऑटिस्टिक बच्चे बोलने से कुछ समय बाद अचानक ही बोलना बंद कर देते हैं तथा अजीब आवाजें निकालते हैं,

सामान्य बच्चे माँ के दूर होने पर या अनजाने लोगों से मिलने पर परेशान हो जाते हैं परन्तु औटिस्टिक बच्चे किसी के भी आने या जाने से परेशान नहीं होते,

ऑटिस्टिक बच्चे तकलीफ के प्रति कोई क्रिया नहीं करते तथा उससे बचने की कोशिश नहीं करते,

सामान्य बच्चे करीबी लोगों को पहचानते हैं तथा उनसे मिलने पर मुस्कुरातें है पर ऑटिस्टिक बच्चे कोशिश करने पर भी किसी से बात नहीं करते जैसे अपनी ही किसी दुनिया में खोये रहतें हैं,

ऑटिस्टिक बच्चे एक ही वस्तु या कार्य में उलझे रहते हैं तथा अजीब क्रियाओ को बार-बार दोहरातें हैं जैसे ओगे-पीछे हिलना, हाँथ को हिलाते रहना, आदि,

ऑटिस्टिक बच्चे अन्य बच्चो की तरह काल्पनिक खेल नहीं खेल पाते वह खेलने की बजाए खिलौनों को सूंघते या चाटतें हैं,

ऑटिस्टिक बच्चे बदलाव को बर्दाशत नहीं कर पाते व अपने क्रियाकलापों को नियमानुसार ही करना चाहतें हैं

ऑटिस्टिक बच्चे या तो बहुत चंचल या बहुत सुस्त रहते हैं,

इन बच्चो में अधिकतर कुछ विशेष बातें होती हैं जैसे किसी एक इन्द्री (जैसे, श्रवण शक्ति) का अतितीव्र होना।

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